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काठमांडू वापस आने पर पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह का स्वागत करने भीड़ ‘हमें अपना राजा वापस चाहिए’ तख्तियां ले उमड़ी पड़ोसी देश नेपाल में राजशाही की वापसी को लेकर हिंसक प्रदर्शन

‘संघीय गणतांत्रिक प्रणाली को समाप्त कर राजशाही स्थापित करो की मांग
उनके बड़े भाई बीरेंद्र शाह की परिवार सहित महल में हत्या कर दी गयी थी ।
झड़प में एक टीवी कैमरामैन समेत दो लोगों की मौत हो गई
नेपाल में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह को एक विवादास्पद और रहस्यमयी व्यक्ति के रूप में

कानपुर 31 मार्च 2025
30 मार्च 2025 पोखरा नेपाल पड़ोसी देश नेपाल में राजशाही की वापसी को लेकर प्रदर्शन हिंसक दौर में प्रवेश कर गया है. शुक्रवार को राजशाही समर्थक प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प में एक टीवी कैमरामैन समेत दो लोगों की मौत हो गई. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कर्फ्यू लगा सेना को बुलाना पड़ा था, जो शनिवार सुबह हटा लिया गया.
राजशाही समर्थक तब से राजशाही की बहाली की मांग कर रहे हैं, जब से पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह ने लोकतंत्र दिवस (19 फरवरी) पर प्रसारित अपने वीडियो संदेश में समर्थन की अपील की थी. राजशाही समर्थक कार्यकर्ताओं ने नौ मार्च को भी 77 वर्षीय ज्ञानेंद्र शाह के समर्थन में उस समय एक रैली की थी जब वह देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक स्थलों का दौरा करने के बाद पोखरा से त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे थे. ज्ञानेंद्र शाह जब काठमांडू लौटे उनका स्वागत करने उमड़ी भीड़ ने तख्तियां ले रखी थीं जिन पर लिखा था, ‘हमें अपना राजा वापस चाहिए’, ‘संघीय गणतांत्रिक प्रणाली को समाप्त करो और राजशाही को पुनः स्थापित करो’ और ‘राजा और देश हमारे जीवन से भी प्यारे हैं. नेपाल में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह को एक विवादास्पद और रहस्यमयी व्यक्ति के रूप में देखा जाता है वह अपने समर्थकों के बीच हुए प्रदर्शनों की वजह से चर्चा में हैं। ज्ञानेंद्र का राजकीय जीवन और उनके परिवार के विरुद्ध आरोपों की कहानी ने नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित किया है।
ज्ञानेंद्र शाह को 2002 में नेपाल की राजगद्दी पर बैठाया गया जब उनके बड़े भाई बीरेंद्र शाह की परिवार सहित महल में हत्या कर दी गयी थी । उन्होंने 2005 में पूर्ण सत्ता पर कब्जा कर संवैधानिक मोड से बाहर निकलकर सरकार और संसद को भंग कर दिया। उनकी कड़ी शासन नीति और माओवादी विद्रोह के दौरान की गई कार्रवाईयों ने उन्हें 2008 में राजसी शासन समाप्त होने के बाद पद छोड़ने के लिए मजबूर किया।
राजा बीरेंद्र शाह की परिवार सहित महल में हत्या के मामले में आधिकारिक जांच के निष्कर्ष विवादास्पद रहे।
आत्महत्या का सिद्धांत: अधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, हत्या के बाद यह कहा गया कि रानी डीडी शाह के छोटे बेटे, राजकुमार निराजन ने परिवार के सदस्यों की हत्या की और फिर खुदकुशी कर ली। यह थ्योरी यह मानती है कि राजकुमार मानसिक रूप से अस्थिर थे।
संभावित षड्यंत्र: कुछ लोग इस घटना को एक राजनैतिक षड्यंत्र के रूप में देखते हैं, जिसमें नेपाल की राजशाही और अन्य राजनीतिक शक्तियों की भूमिका हो सकती है। यह थ्योरी कभी स्पष्ट रूप से सिद्ध नहीं हुई, लेकिन इस पर चर्चा होती रही है।
अन्य जांचें:  कुछ जांचें  घटना के पीछे कुछ और शक्तियों की संलिप्तता  व्यक्त 
करती है ।लेकिन उन्हें कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। पूरी सत्यता आज तक स्पष्ट नहीं हुई है ।
नेपाल में राजशाही समर्थक प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान काठमांडू में दो लोगों की मौत और कई अन्य घायल हुए। काठमांडू महानगरपालिका ने ज्ञानेंद्र पर 7,93,000 नेपाली रुपये का जुर्माना लगाया है, जो कि प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान के लिए है।ज्ञानेंद्र के पास सैकड़ों अरब डॉलर की अकूत संपत्ति व नेपाल में कई व्यवसाय और संपत्तियाँ शामिल हैं। वह व्यापक रूप से एक प्रभावशाली और आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्ति है।राजशाही की बहाली की मांग, ज्ञानेंद्र की राजनीतिक सक्रियता, और उन पर लगे हिंसा के आरोप नेपाल में एक बार फिर से राजशाही के प्रति समर्थन को बढ़ावा दे रहे हैं। उनकी वापसी पर भारी जनसमर्थन और विरोध प्रदर्शन का आयोजन दोनों ही दर्शाते हैं कि नेपाल की जनता एक बार फिर से अपने पूर्व राजशाही के प्रति विचार कर रही है。

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