अजमेर के एक गांव में एक बारात में 25 बाराती 30 घराती 75 पुलिसकर्मी सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा आज भी जातिवाद के पाप की उपस्थिति को प्रर्दशित करता हैं।
समाज में जातिवाद और सम्मान की लड़ाई जारी आज भी जातिवाद के पाप की उपस्थिति भारत के संविधान के अनुसार हर व्यक्ति को एक समान महत्व देना होगा अजमेर के एक गांव में एक बारात में 25 बाराती 30 घराती 75 पुलिस वाले असमानता और घृणा के कारण दूल्हे के घोड़ी पर चढ़ते समय सुरक्षा की आवश्यकता कानपुर 25 जनवरी 2025 25 जनवरी 2025 राजस्थान के अजमेर जिले के एक गांव में एक बारात प्रेम और आनंद का प्रतीक समाज में फैले जातिवाद और असमानता का उदाहरण को उजागर करती है। बारातों में अप्रिय घटनाएं घटित होने के कारण दुल्हन परिवार ने पुलिस से सुरक्षा की मांग की । इस बारात में 25 बाराती, 30 घराती और 75 पुलिसकर्मी शामिल थे। यह हमारे सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा आज भी जातिवाद के पाप की उपस्थिति को प्रर्दशित करता हैं। दूल्हे का घोड़ी पर चढ़ना भारतीय विवाह की परंपरा है, जो खुशी, उत्साह और सम्मान का प्रतीक समझा जाता है। यह परंपरा जाति या समाज से जुड़ने से विषाक्तता में परिवर्तित हो जाती है असमानता और घृणा के कारण दूल्हे के घोड़ी पर चढ़ते समय सुरक्षा की आवश्यकता इंगित करती है कि लोग ऐसी परंपराओं को स्वीकार नहीं क...


